
वंदेभारतलाइवटीव न्युज, रविवार 01 मार्च 2026
* नागपुर *
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卐 सभी माताओं बहनों भाईयों को होलिका दहन, धुलंडी रंगोत्सव, रंग पंचमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं 卐
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होली रंगों उमंग प्रेम भाईचारे का पावन पर्व है। बच्चे बुजुर्ग सभी होली के इस पावन त्योहार का बेसब्री के साथ इंतजार करते हैं। होली के अवसर पर रंग गुलाल खेलना खुशी और उमंग का प्रतीक भी माना जाता है। होली पर रंग गुलाल अवश्य ही खेलना चाहिए, परन्तु होली खेलने के लिए उचित सही रंगों का चयन करना भी बहुत जरूरी है। होली खेलते समय रंगों के चयन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। सिंथेटिक रंगों मौजूद तत्व शरीर की त्वचा को नुकसान भी पहुंचा सकतें हैं। केमिकल युक्त रंग गुलाल से एलर्जिक खतरा भी रहता है। आजकल बाजार में बिकने वाले सिंथेटिक रंगों से स्वास्थ्य के लिए खतरे भी बनते जा रहे हैं। बाजार में बिकने वाले सस्ते और चमकीले रंगों में हानिकारक केमिकल का उपयोग भी किया जाने लगा है, जो कि हमारे शरीर पर विपरीत प्रभाव छोड़ते हैं। यह केमिकल युक्त रंग गुलाल हमारे आंखों बालों शरीर की त्वचा पर विपरीत प्रभाव भी डाल सकते हैं। इसीलिए होली खेलते समय पर विशेष सावधानी भी जरूरी है। होली खेलने के लिए सदैव प्राकृतिक आर्गेनिक रंगों का उपयोग करना स्वास्थ्य की दृष्टि से सुरक्षित भी रहता है। विशेषकर बच्चों बुजुर्गों एवं अस्थमा के मरीजों को होली खेलते समय विशेष सावधानी रखने की जरूरत भी है। केमिकल युक्त रंग शरीर की त्वचा पर खुजली, एलर्जी, जलन भी पैदा कर सकते हैं। होली खेलने के दौरान उड़ने वाले रंगों के बारीक कण के आंखों मे जाने पर संक्रमण, का भी खतरा हो सकता है। होली खेलने के दौरान आंखों में रंग गुलाल आदि चले जाने पर आखों को तुरंत ही साफ स्वच्छ जल से धोना चाहिए। सिंथेटिक रंगों में मौजूद तत्व सास लेने के दौरान शरीर मे प्रवेश कर श्वसन तंत्र पर असर डाल सकते है, जिससे गले में जलन, सांस लेने परेशानी, खांसी आदि परेशानी भी हो सकती है। होली खेलते समय जरा सी सावधानी रखकर हम सुरक्षित स्वस्थ तरीके से आनंदमय होली मना सकते हैं। होली खेलते समय प्राकृतिक रंगों का उपयोग करके अपने शरीर को सुरक्षित रख सकते हैं। प्राकृतिक रंग हमारे पर्यावरण के हिसाब से भी बेहतर विकल्प हो सकते हैं। होली खेलते समय जरा सी असावधानी हमारे अनमोल स्वास्थ्य को बिगाड़ सकता है। चिकित्सक भी केमिकल युक्त रंगों से बचने और प्राकृतिक रंगों का उपयोग करने की सलाह दिया करते हैं। केमिकल युक्त रंगों से परहेज करें । होली खेलने के पूर्व अपने शरीर पर सरसों तेल या फिर नारियल तेल जरूर लगाना चाहिए, इससे शरीर पर लगने वाले रंग आसानी के साथ छूट भी जाते हैं। तेल लगाने से शरीर की त्वचा में नमी भी बनी रहती है। होली खेलने के दौरान आंखों में चश्मा भी लगाया जा सकता है, इससे रंगों के बारीक कण आंखों में जाने से बचाया जा सकता है। होली खेलने के बाद आंखों में किसी प्रकार से जलन या परेशानी होने लगे तो आंखों को साफ ठंडे जल से धोना चाहिए अधिक परेशानी होने पर तुरंत ही अपने चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। आजकल केमिकल एवं रंग मिलाकर भी गुलाल तैयार किया जाता है जो कि नुकसानदायक सिद्ध हो सकता है। होली खेलने के बाद त्वचा पर लगे रंगों को जबरदस्ती नहीं निकालना चाहिए, त्वचा से रंग यदि छूट नहीं रहा हो तो त्वचा को रगड़ना नहीं चाहिए, बल्कि तेल दही या बेसन का उपयोग करते हुए धीरे धीरे त्वचा से रंग छुड़ाने की कोशिश करनी चाहिए। होली पर ज्यादा तड़क भड़क वाले रंग होली के आनंद को बिगाड़ भी सकते हैं। अधिक केमिकल युक्त रंगों का उपयोग करने से बचें। शरीर पर ज्यादा देर तक रंगों लगाए न रखें। धुप में अधिक समय तक होली खेलने से बचना चाहिए। शरीर पर लगे हुए रंगों को छुड़ाने के लिए किसी प्रकार के डिटर्जेंट पावडर या केरोसिन का उपयोग भी नहीं करना चाहिए। होली खूब उमंग उत्साह के साथ खेलें पर सावधानी भी रखें। जीवन अनमोल है जरा सी लापरवाही खतरे को निमंत्रण भी दे सकती है। सावधान रहें सुरक्षित रहें। होली ऋतु परिवर्तन का अवसर भी है। ऐसे में खानपान भी ध्यान देना चाहिए। होली की खुशी में अधिक मिर्च मसालेदार खाना खाने से भी बचना चाहिए। होली के उमंग में शराब आदि नशीले पदार्थों से भी बचना चाहिए। पूरे परिवार के साथ, मित्र बंधुओं के साथ खूब उत्साह उमंग के साथ होली का यह पावन पर्व मनाएं, अपना एवं अपने स्नेहीजनों के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें। होली का पावन पर्व सभी के लिए आनंददायक; सुख समृद्धि कारक, शांति सौभाग्य दायक दीर्घायु प्रदान करने वाला सिद्ध हो । ।।।आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं। ।।।







